Saturday, 6 January 2018


ये व्हिडीओ जो आप देख रहे है जिस मे वादक नगारे को बजा रहा उसे मथूरा संगीत कहते है...मथुरा लभान समाज का ये पारंपरिक संगीत है... अगर इतिहास के पन्नो को पलटा जाऐ तो इस समाज की नीव राजस्थान मे मिलती है... राजस्थान से गुजरात फिर मध्यप्रदेश फिर महाराष्ट्र और फिर आंध्रप्रदेश इस तरह से ये समाज शिफ्ट होता गया... इस समाज का मुख्य व्यवसाय भेड बकरी चराना है... भारत को आझाद हुऐ ७० साल हो चुके है लेकीन ये समाज आज भी आवश्यक चिजोंसे वंचित है... खैर छोडीये ! इस बार हम संगीत पर ही बोलेंगे...

मथुरा इस नाम से हिंट लग जाती है की इस संगीत का कनेक्शन सिधा कृष्ण से है... जन्माष्टमी यांनी कृष्णजन्म का दिन इस समाज के लिए दिवाली से बढकर है... जन्माष्टमी के महिने मे यानी श्रावण के महिने मे मथूरा नृत्य किया जाता है... इस दौरान रामायण, महाभारत के किस्सो पर गीत गाये जाते है... इन गितो मे राम, सिता, हनुमान, कृष्ण की स्तुती की जाती है... व्हिडीओ के शूरुवात मे जो नगारा बज रहा है ठिक वैसेही नगारे मेघालया, मणिपूर, सिक्कीम, लडाख मे बतौर पारंपरिक वाद्य इस्तमाल किऐ जाते है... इन नगारो की धून, युवको के पैरोके घुंगरू और उनके हात मे जो बांबू है उसकी आवाज... इन तिनो का फ्यूजन बेमीसाल है जो किसीको भी आकर्षित कर सकता है... हफ्तेभर से महाराष्ट्र के विदर्भ के टूर पर हूँ... एक कार्यक्रम दौरान इस समाज के लोगो से मुलाकात हुई... इन लोगो से रुबरू होने का ये पल यादगार रहेगा...

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